पुराना ज़माना – गया ज़िले के बुज़ुर्गों से बातचीत

बिहार के गया ज़िले में स्थित सहोदय ट्रस्ट के बच्चों ने गाँव के बुजुर्ग, श्री रोहण यादव से बातचीत की और पता किया की पुराने

Continue reading

भूमिहीन नहीं थे हम पहले

अमित: ये कहानियाँ 1997 में पश्चिम चंपारण ज़िले में गाँव की मीटिंग में सुनीं थीं। स्कूल के कमरे में एक दिवसीय मीटिंग के लिये इकट्ठे

Continue reading

पेरियार और जाति का उन्मूलन

युवानिया डेस्क: पेरियार ई. वी. रामासामी ने भारत में जाति उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उन्होंने तमिल नाडु में आत्मसम्मान आंदोलन की स्थापना की और

Continue reading

हम गरीब कैसे बने – 3 : महंगी पड़ी नमला को जुवार!

कुछ सुनी, कुछ आँखों देखी – अस्सी – नब्बे के दशक में पश्चिम मध्य प्रदेश के आलीराजपुर ज़िले में खेडुत मजदूर चेतना संगठ में काम

Continue reading

कहाँ चले गए साकची (जमशेदपुर) के आदिवासी ?

संजय बाड़ा: ’30 साल पहले टाटा स्टील में आदिवासी मज़दूरों की संख्या करीब 29 हज़ार थी, जो अब घटकर लगभग 1900 हो गई है।’ यह

Continue reading

हम गरीब कैसे बने – 2 : “घर बखर सब आपका लेकिन डेहरी के अंदर पांव मत रखना!”

आदिवासियों से ज़मीन छिनने की कहानी अमित: मध्य प्रदेश के सतना ज़िले के श्री साधूराम से सुनकर अमित ने लिखी यह कहानी सतना ज़िले के

Continue reading

1 2 3