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महाराष्ट्र राज्यातील जादूटोणा विरोधी कायद्याची पार्श्वभूमी आणि यशस्वीता

डॉ. सुदेश घोड़ेराव: साधारणपणे 1990 च्या सुमारास डॉ. नरेंद्र दाभोळकर यांच्या प्रमुख नेतृत्वातून आणि माजी न्यायमूर्ति चंद्रशेखर धर्माधिकारी, एडवोकेट भास्करराव मिसर यांचे प्रयत्नातून जादूटोणा विरोधी कायद्याचे  प्रारूप तयार केले गेले. हा सुरवाती चा कायदा खूपच सखोल आणि विविध अंधश्रद्धांच्या प्रकरणा विरोधात कठोर भूमिका घेणारा होता. अनेक कलमांचा त्यात समावेश होता. परंतु कायदा मंजूरीच्या प्रक्रियेत यातील

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भारत के वैज्ञानिक: डॉ. जगदीष चन्द्र बोस

अमित: दोस्तों, जब हमें कोई थप्पड़ लगाता है तो हमें बुरा लगता है, जब कोई हमें प्यार करता है तो अच्छा लगता है। कभी हम खुश होते हैं, और कभी हम दुखी होते हैं। जानवर भी इसी तरह कभी खुश होते हैं, कभी लड़ते हैं। पर क्या तुम्हे मालूम है कि पौधे में भी इसी

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ସାପ କାମୁଡାର ସଠିକ୍ ଚିକିତ୍ସାରୁ ବୈଜ୍ଞାନିକ ଚେତନାର ଶିକ୍ଷା ଦେଲେ। | सर्पदंश के सही इलाज से सिखाया वैज्ञानिक चेतना का सबक

ନରେନ୍ଦ୍ର ପିଙ୍ଗୁଆ (नरेंद्र पिंगुआ): ମୋର ନାମ ନରେନ୍ଦ୍ର ପିଙ୍ଗୁଆ ଗ୍ରାମ ରଙ୍ଗିଆପାଳ ପୋଷ୍ଟ ଇଞ୍ଜିଡ଼ି ଥାନା  ଖମାର ଜିଲ୍ଲା ଅନଗୁଳ ଓଡିଶା ମୁଁ ଆପଣ ମାନଙ୍କୁ ଏକ ସତ୍ୟ ଘଟଣା ର କାହାଣୀ କହିବାକୁ ଯାଉଛି! ଆମ ଗାଁ ଏକ ଆଦିବାସୀ ବହୁଳ ଗାଁ ଆଦିବାସୀ ଲୋକ ପୂଜା ପାଠ ଉପରେ ବେଶୀ ବିଶ୍ୱାସ କରି ଥାନ୍ତି! ସେହି ଭଳି ଗତ ପାଞ୍ଚ ବର୍ଷ ପୂର୍ବେ ମୋ ବାପା ଦୁଲାଳ ପିଙ୍ଗୁଆ ବୟସ 80ବର୍ଷ ଙ୍କୁ

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वैज्ञानिक चेतना फैलाने के प्रयासों की भी हत्या है तर्कवादियों की हत्या

गौरी लंकेश – 5 सितंबर 2017   भारत के बंगलुरू शहर में मंगलवार शाम वरिष्ठ पत्रकार और कथित तौर पर दक्षिणपंथियों की आलोचक रही गौरी लंकेश की हत्या कर दी गई। पुलिस के अनुसार शाम को वो अपने घर लौटकर दरवाज़ा खोल रही थीं, तब मोटरबाइक पर सवार हमलावरों ने उन पर गोलियां चलाईं। उनके

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तुम मौज उड़ाया करते हो

शुभम: तुम मौज उड़ाया करते होतुम मौज उड़ाया करते होयूं धुआं उड़ाए जाते हो, तेल का दाम बढ़ाए जाते होयूं लहू बहाए जाते हो, यूं स्वपन दिखाए जाते होयूं बेकद्री से जानता के अरमान जलाए जाते हो तुम मौज उड़ाया करते होतुम मौज उड़ाया करते होयूं तानाशाही करते हो, यूं धौष जमाया करते होयूं अक्सर

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वैज्ञानिक चेतना और अन्धविश्वास निर्मूलन पर काम कर रही संस्थाएं/समूह

युवानिया डेस्क: 1. असम साइंस सोसाइटी, असम: असम साइंस सोसाइटी एक स्वैच्छिक संगठन है जिसे वर्ष 1953 में “गौहाटी साइंस सोसाइटी” के रूप में स्थापित किया गया था और बाद में वर्ष 1956 में इसका नाम बदलकर “असम साइंस सोसाइटी” कर दिया गया। सोसाइटी की पूरे असम में 100 से ज़्यादा शाखाएँ हैं, जिसमें इसकी

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उत्तराखंड में अंधविश्वास की स्थिति

गोपाल लोधियाल:  उत्तराखंड में अंधविश्वास की स्थिति का अगर विश्लेषण किया जाए तो अंधविश्वास लगातार फल-फूल रहा है और इस धंधे में लगे हुए लोग भी बहुत मजबूती के साथ फल-फूल रहे हैं।  यहां कुछ लोग इस धन्दे को व्यापक रूप से फैला रहे हैं। इनके अंधविश्वास को फैलाने के कई तरीके हैं –  यहाँ

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समाज में प्रचलित अंधविश्वास और इससे हो रहे नुकसान 

जागृति: वर्तमान समय को लोग आधुनिक काल कहते हैं, जिसमें लोग विज्ञान के क्षेत्र में तरक्की कर रहे है और लोगों का जीवन वैज्ञानिक तथ्यों से घिरा हुआ है। लोगों के निजी जीवन से लेकर उनके कार्यक्षेत्रों तक में वैज्ञानिक उपकरणों का ही उपयोग होता है। साथ ही मनुष्य के शरीर में होने वाले रोगों

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सामाजिक परिवर्तन शाला शिविर-1 झिरी (राजस्थान): देशभर के सामाजिक कार्यकर्ताओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की अनूठी पहल

विकास कुमार: 21वीं सदी तकनीकी क्रांति का दौर है। विज्ञान के क्षेत्र में नए-नए अविष्कार से मानव सभ्यता अपने शिखर पर पहुँच रही है। वहीं इसके विपरीत आज सामाज में अंधविश्वास और रूढ़िवादी मान्यतायों, परंपराओं का बोलबाला हो रहा है। सामाजिक आन्दोलनों द्वारा हुए सामाजिक परिवर्तन की उपलब्धियों को प्रतिगामी शक्तियाँ पीछे धकेल रही हैं।

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