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तय करो किस ओर हो तुम: बल्ली सिंह चीमा की कविता

युवानिया डेस्क: बल्ली सिंह चीमा का जन्म 2 सितम्बर, 1952 में चीमाखुर्द गाँव, अमृतसर ज़िला, पंजाब में हुआ था। इनकी माता का नाम सेवा कौर था। इन्होंने स्नातक के समकक्ष प्रभाकर की डिग्री ‘गुरु नानक विश्वविद्यालय’, अमृतसर से प्राप्त की थी। चाहे उत्तराखंड आंदोलन रहा हो या फिर राज्य बनने से पूर्व शराब विरोधी आंदोलन,

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ଆଜିର ବ୍ୟବସ୍ଥା ରାଜ୍ଯ ର ଅବସ୍ଥା शोषण को स्वीकार करके दुखी और गरीब होगा खेतिहर मजदूर : ओड़िया कविता

ମନ ସିଂ ମୁର୍ମୁ (मान सिंह मुर्मु): ଆଜିର ବ୍ୟବସ୍ଥା                ରାଜ୍ୟର ଅବସ୍ଥା ନେତା ମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ସକାଶେ ।                 ନିଜେ ବ୍ୟବସ୍ଥାରେ ବସି ଗଢିଲେ ନୀତି ପୁଣି କରୁଛନ୍ତି ବ୍ୟବସ୍ଥାରେ ଅନୀତି                  ଜନ ଆନ୍ଦୋଳନକୁ ଦେଲେ ଦେଶ ଦ୍ରୋହୀ । ଖାଇ ଗଲେ ନେତା ମନ୍ତ୍ରୀ ଠକ ଚାମଚା ଦେଶ ହେଲା ଖୋଳ                  ଗରିବ ଚାଷି ଶ୍ରମିକଙ୍କ ଗଲା ତାଙ୍କର ସବୁ ବଳ  ପର ସୁଖ ପାଇଁ ନିଜେଖଟିଲେ ସାଜିଲେ ଚାକର ପଣ ।        ସବୁଠାରେ ଠକାମୀ

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झारखंड की साथी सलोमी एक्का की ज़ुबानी उनका संछिप्त परिचय

सलोमी एक्का: मैं झारखंड राज्य के रांची ज़िले के लोधमा गाँव के एक आदिवासी किसान परिवार से आती हूँ। परिवार में पाँच भाई बहनों में मेरा स्थान चौथा है। पिताजी साक्षर थे लेकिन माँ तो कभी भी स्कूल तक पहुंची ही नहीं। फिर भी आज हम यहाँ तक पहुंचे और गाँव से निकलकर शहर के

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किशोर न्याय (बालकों की देख-रेख और संरक्षण) अधिनियम: एक परिचय

लेखक:  राजू राम, स्वप्निल  शुक्ला:  जैसा कि हमको पता है जब कोई व्यक्ति अपराध करता है तो पुलिस के पास अधिकार है कि उसे गिरफ्तार करे। लेकिन वही अपराध अगर कोई  बच्चा  करता है तो क्या उसे गिरफ्तार करना सही होगा? आपराधिक न्याय प्रणाली बताती हैं कि कानून के अंतर्गत अपराध होने के लिए मुख्यतः

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पिता की शराब की लत के सज़ा बुगत रहे हैं अररिया, बिहार के यह मासूम

विजय:  साथियों, बड़े दुःख के साथ लिखना पड़ रहा है। केवल लिखने  से इसका हल नहीं होगा, इस पर हम सभी साथियों को काम करना पड़ेगा और कल का एक बेहतर रास्ता बनाना पड़ेगा।  मैं अररिया में जहाँ रहता हूँ, वहीं बगल में एक महादलित परिवार अपना छोटा सा घर बनाकर गुजर-बसर करता है। उस

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फ़ैज़ाबाद में बुजुर्गों की मनोसामाजिक स्तिथि पर संक्षिप्त रिपोर्ट

शुभम: समाज कार्य के अंतिम सेमेस्टर में मुझे एक प्रकरण लिखने का मौका मिला। प्रकरण की थीम थी- बुजुर्गों की मनोसामाजिक स्तिथि। प्रकरण लिखने के लिए मैंने 100 वृद्ध लोगों से बात की और प्रश्नावली बनाके उनसे सवाल किए। ये सभी सवाल उनकी मानसिक और सामाजिक स्तिथियों को जानने के लिए बनाए थे।  पृष्ठभूमि: वृद्धावस्था,

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स्पेशल रिपोर्ट : म. प्र. की भीमबेटका गुफाओं में हज़ारों साल पुराने शैलचित्रों में दिखता आदि मानव का अतीत

विकाश कुमार:  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से करीब 45 कि.मी. दूर दक्षिण पूर्व पर स्थित भीमबेटका गुफाएं किसी भी इतिहास प्रेमी को अपनी ओर खींची चली जाती हैं। वजह है हमारे पूर्वजों द्वारा बनाए गए हज़ारों साल पुराने शैलचित्र और शैलाश्रय या रॉकशेल्टर यहाँ आज भी मौजूद हैं। विंध्याचल पहाड़ों में 10 कि.मी. क्षेत्र

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कलम आधी नहीं हो सकती

इंदु सिंह: कलम आधी नहीं हो सकतीकलम पीछे नहीं लौट सकतीजितनी बंदूके हैं दुनिया मेंपेंसिल कलम उनसे ज़्यादातादाद में, एक कलमजीवन जीती है,अभिव्यक्ति करती है,प्यार करती है,गुस्सा करती है,क्रांति करती है,नफ़रत नहीं करती,नफ़रत नहीं फैलाती। विकास का पहिया अबआगे बढ़ने लगा,कलम भी क्यानफ़रत फैलाने लगी है? जिनकी स्याही सूख गयीवो दाग दे कर,कागज़ मटमैला कर

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ବର୍ଷା (वर्षा)

सोनामुनी मुर्मू: ପହିଲି ପରଶ ବର୍ଷା ରାଣୀର,ମନରେ ଜାଗି ଉଠିଲା ତୁପ୍ତି ଆନନ୍ଦର। ବର୍ଷା ର ସ୍ପର୍ଶ ପାଇ ଖୋଲିଲା ଆଖିପତା,ହସି ଉଠିଲା କେତେ ଯେ ତରୁଲତା । ଭରି ଉଠିଲା ଧରଣୀ, ଯେବେ ବରଷିଲା ବର୍ଷା,ଦୂରେ ଚାଲିଗଲା ତେବେ ଗିର୍ଷମ ର ଉସ୍ମତା । ଭରି ଦେଲା ସଭିଙ୍କ ମନରେ ଶିହରଣ ସତେ,ସବୁଜ ରଂଗ ର ସୁରଷ୍ଟି ହେଲା ଅଜାଣତେ । ନଇ ନଦୀ ନାଳ ପୁରି ଉଠିଲା ଜଳରେ,ଖୁସି ରେ ଚାଷୀ ତିନ୍ତେ ତାର

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