ମୋ ଜୀବନର ଆଦର୍ଶ (मेरे जीवन का आदर्श)

दयानंद बछा (ଦୟାନନ୍ଦ ବଛା): ଯଦିଓ ଆଜି ପଙ୍କରେ ଫୁଟିଥିବାପଦ୍ମ ଟିଏ ପରିନିଭୃତ ଅରଣ୍ୟର କଣ୍ଟାବୁଦାରେବଣ ମଲ୍ଲୀ ଟିଏ ଭଲିଫୁଟିଛି ଏଇ ଅଜ୍ଞାତ ବଣରେମହକାଇବି ଦିନେ ସାରା ଦୁନିଆକୁମୋର ସୁମଧୁର ବାସ୍ନାରେ….। ସରଳ ଜୀବନ

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क्यों अडिग है किसान आंदोलन ?

अरविंद अंजुम: आप जानते ही हैं कि पिछले 9 महीने से भी ज़्यादा समय से किसान तीन कृषि कानूनों की वापसी और न्यूनतम समर्थन मूल्य

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आज मेरी प्यारी बहनों के लिये

उमेश्वर सिंह अर्मो: यह कविता लेखक ने रक्षाबंधन के समय लिखी थी आहत न होना बहन,मैं दिल की खोल रहा हूँ..!जय भीम मेरी बहन,मैं तेरा

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बूढ़ा किसान और उसकी लाचारी

एम.जे. वास्कले: मेरे एक पड़ोसी हैं रामू, जो एक किसान हैं और अपनी पत्नी कमला के साथ रहते हैं। उन्हें मैं रामू काका और कमला

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