कविता: मेरे देश की आँखें- अज्ञेय

नहीं, ये मेरे देश की आँखें नहीं हैंपुते गालों के ऊपरनकली भवों के नीचेछाया प्यार के छलावे बिछातीमुकुर से उठाई हुईमुस्कान मुस्कुरातीये आँखें –नहीं, ये

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हरेली त्यौहार, संगठन कार्यकर्ता पर फर्जी कार्रवाई और आदिवासियों की ज़मीन से बेदखली पर छत्तीसगढ़, म. प्र. और बिहार से स्थानीय खबरें

गाँव-गाँव में मनाया गया हरेली त्यौहार  -(छत्तीसगढ़) हरेली छत्तीसगढ़ी लोक परंपरा व संस्कृति का पहला राजकीय त्यौहार है। हरेली इसलिए मनाया जाता है, क्योंकि इस

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माँ प्रकृति – एक कविता

गोपाल पटेल: माँ प्रकृति ने पाला मुझे,संवारा है, बड़ा किया है। लालन-पालन भी किया तूने,मुझे इतना प्रेम दिया तूने.. । क्या कहूँ तेरी इस रहनुमाई

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धान कूटते हुए निकली नई सुबह में जीवन की आवाज़- संस्मरण

एलीन: एतवारी लगभग 30 साल की हो गई है। अपने गांव के देस से दूर दिल्ली शहर में एक सामाजिक संस्था के साथ काम करती

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ବିଶ୍ବ ପ୍ରକୃତି ସଂରକ୍ଷଣ ଦିବସ | विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस

अन्नपूर्णा महालिंग:  ବିଗତ ଦୁଇ ଶହ ବର୍ଷରେ ମନୁଷ୍ୟ ଯେତିକି ଉନ୍ନତ ଶୌଲିର ଜୀବନ ଯାପନ କରି ଆସିଛି ତାହା ଗତ ଦୁଇ ହଜାର ବର୍ଷରେ ଘଟିନଥିଲା। ଏବେ ମନୁଷ୍ୟ ନିଜର ବୈଜ୍ଞାନିକ ଜ୍ଞାନ

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युवा पहल: ग्रामीण शिक्षा की नींव मज़बूत करने के लिए युवाओं की कुछ पहल

सुरेश डुडवे: साथियों हम सभी जानते हैं कि हमारे जीवन में शिक्षा कितनी महत्वपूर्ण है। अच्छी शिक्षा इंसान के अंदर इंसानियत पैदा करती है। किसी

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